Tuesday, February 7, 2023
Home DeshBhakti Poem In Hindi 15 August Poem In Hindi (स्वतन्त्रता दिवस कविता ) Poem On Independence Day In Hindi

(स्वतन्त्रता दिवस कविता ) Poem On Independence Day In Hindi

Swatantrata Par Kavita Hindi Mein (Poem On Freedom In Hindi)

जिस देश में गंगा बहती है: शैलेन्द्र
होठों पे सच्चाई रहती है,जहां दिल में सफ़ाई रहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी है
जिस देश में गंगा बहती है
Azadi Par Kavita In Hindi


मेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है
ज़्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े मे गुज़ारा होता है
बच्चों के लिये जो धरती माँ, सदियों से सभी कुछ सहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है
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कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं, इन्सान को कम पहचानते हैं
ये पूरब है पूरबवाले, हर जान की कीमत जानते हैं
मिल जुल के रहो और प्यार करो, एक चीज़ यही जो रहती है
हम उस देश के वासी हैं,हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है
Poem On Nationalism In Hindi

जो जिससे मिला सिखा हमने, गैरों को भी अपनाया हमने
मतलब के लिये अन्धे होकर, रोटी को नही पूजा हमने
अब हम तो क्या सारी दुनिया, सारी दुनिया से कहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है..
Small Poem On Azadi In Hindi

Sachchidananda Vatsyayan (सच्चिदानंद हीरानंद वात्‍स्‍यायन) Ki Kavita
15 August Poem In Hindi

मेरे देश की आंखें: अज्ञेय (Long Poem On Independence Day In Hindi)
नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं
पुते गालों के ऊपर
नकली भवों के नीचे
छाया प्यार के छलावे बिछाती
मुकुर से उठाई हुई
मुस्कान मुस्कुराती
ये आंखें
15 August Par Kavita
नहीं, ये मेरे देश की नहीं हैं…
तनाव से झुर्रियां पड़ी कोरों की दरार से
शरारे छोड़ती घृणा से सिकुड़ी पुतलियां
नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं…
वन डालियों के बीच से
चौंकी अनपहचानी
कभी झांकती हैं
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वे आंखें,
मेरे देश की आंखें,
खेतों के पार
मेड़ की लीक धारे
क्षिति-रेखा को खोजती
सूनी कभी ताकती हैं
वे आंखें…
स्वतंत्रता दिवस पर कविता
उसने
झुकी कमर सीधी की
माथे से पसीना पोछा
डलिया हाथ से छोड़ी
और उड़ी धूल के बादल के
बीच में से झलमलाते
जाड़ों की अमावस में से
मैले चांद-चेहरे सुकचाते
में टंकी थकी पलकें
उठाईं
और कितने काल-सागरों के पार तैर आईं
मेरे देश की आंखें…

Swatantrata Diwas Pr Kavita Poem On Independence Day 2020

Ram Prasad Bismil (राम प्रसाद ‘बिस्मिल’) Ki Kavita

आजादी: राम प्रसाद बिस्मिल (स्वतन्त्रता दिवस कविता)
इलाही ख़ैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं,
हमें तोहमत लगाते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं
कभी आज़ाद करते हैं, कभी बेदाद करते हैं
मगर इस पर भी हम सौ जी से उनको याद करते हैं
15 August Indian Independence Day Poems And Kavita In Hindi
असीराने-क़फ़स से काश, यह सैयाद कह देता
रहो आज़ाद होकर, हम तुम्हें आज़ाद करते हैं
रहा करता है अहले-ग़म को क्या-क्या इंतज़ार इसका
कि देखें वो दिले-नाशाद को कब शाद करते हैं
यह कह-कहकर बसर की, उम्र हमने कै़दे-उल्फ़त में
वो अब आज़ाद करते हैं, वो अब आज़ाद करते हैं
सितम ऐसा नहीं देखा, जफ़ा ऐसी नहीं देखी,
Best Poem On Independence Day In Hindi
वो चुप रहने को कहते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं
यह बात अच्छी नहीं होती, यह बात अच्छी नहीं करते
हमें बेकस समझकर आप क्यों बरबाद करते हैं?
कोई बिस्मिल बनाता है, जो मक़तल में हमें ‘बिस्मिल’
तो हम डरकर दबी आवाज़ से फ़रियाद करते हैं

Independence Day Poems In Hindi
Independence Day Poem : 15 अगस्त

DeshBhakti Kavita
DeshBhakti Poem In Hindi

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